वाराणसी, नवम्बर 30 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। विद्यानिवास मिश्र के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संकल्पित शृंखला के आठवें चरण में काशी के दो दिग्गज साहित्यकारों के अवदान पर शनिवार को चर्चा हुई। चर्चा के केंद्र में भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र के फुफेरे भाई राधाकृष्ण दास तथा हिंदी में गद्य गीत विधा के प्रणेता राय कृष्ण दास रहे। साहित्यिक संघ एवं विद्याश्री न्यास के संयुक्त तत्वाधान में 'हिंदी धरोहर : काशी की सृजन परंपरा' का यह आयोजन अर्दली बाजार स्थित राजकीय पुस्तकालय में हुआ। अध्यक्षीय संबोधन में साहित्यकार ओम धीरज ने कहा कि समय के क्रूर प्रभाव में बहुत से महत्वपूर्ण लोग इतिहास के पन्नों में विलुप्त होते जाते हैं। जबकि महत्व की दृष्टि से इनका योगदान किसी से कम नहीं होता। बाबू राधा कृष्ण दास और राय कृष्ण दास ऐसे ही लोग रहे हैं। इससे पूर्...