प्रयागराज, फरवरी 5 -- प्रयागराज। दो दशक तक लड़ाई के बाद भी बेरोजगारों की सरकारी नौकरी पाने की चाह पूरी नहीं हो सकी। हाल के दो मामले इस बात का उदाहरण है कि योग्यता के बावजूद नौकरी मिल जाए यह जरूरी नहीं। सबसे पहले बात करते हैं प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) 2004 भर्ती की। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने 22 साल पहले प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिए यह भर्ती निकाली थी। उसमें अभ्यर्थी रही अर्चना मौर्या सफल थी लेकिन चयन बोर्ड ने उन्हें बिना कोई कारण बताए फेल कर दिया था। बाद में अर्चना को आरटीआई में पता चला कि वह परीक्षा में पास थी। चयन बोर्ड के चक्कर काटने के बाद हारकर अर्चना ने 2016 में हाईकोर्ट में याचिका कर दी। हाईकोर्ट ने छह जनवरी को मामले का निस्तारण करते हुए चयन बोर्ड को याचिकाकर्ता की अयोग्यता का कारण बताने ...