बांका, फरवरी 1 -- बांका। निज प्रतिनिधि। जिले में बालू के अनवरत हो रहे खनन से नदियों व जलस्त्रोतों का अस्तित्व खतरे में पड गया है। जिससे क्षेत्र में देसी मछलियों का उत्पादन भी थम गया है। यहां कैटफिश की सिंघी, देसी मांगुर, कबई व टेंगरा आदि मछलियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है। ऐसे में इन मछलियों को विलुप्त होने से बचाने के लिए सरकार की ओर से मत्स्यपालन के लिए न सिर्फ अनुदान दिया जा रहा है बल्कि देसी नस्ल की मछलियों का बीज तैयार करने की योजना को भी बढावा दिया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने मत्स्य प्रजाति विविधिकरण योजना की शुरूआत की है। इस योजना से क्षेत्र में देसी मछलियों के उत्पादन को संजीवनी मिलेगी। इसके तहत देसी मछलियों के उत्पादन व उसका जीरा तैयार करने के लिए मत्स्यपालकों को जागरूक किया जायेगा। अब मत्स्यपालक तालाब के साथ ही बायोफ्ल...
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