गया, दिसम्बर 30 -- बोधगया के तेरगर बौद्ध मठ के समीप पवेलियन में चल रहे 40वें काग्यू मोनलम पूजा के चौथे दिन मंगलवार को तिब्बती आध्यात्मिक गुरु 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे ने ऑनलाइन माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्मदेशना प्रदान की। वज्रधारा की प्रार्थना के साथ मंडल दान किया गया। साथ ही देवी तारा और सरस्वती के मंत्रों का जाप किया। करमापा ने कहा कि तिब्बती बौद्ध धर्म की काग्यू परंपरा के संस्थापक और प्रथम करमापा दुसुम ख्येम्पा की शिक्षाएं आज भी हर युग के लिए प्रासंगिक हैं। बोधिसत्व के रूप में हमें दूसरों के कल्याण और निर्वाण के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि चित्त से ही कुशल और अकुशल कर्मों का संपादन होता है। इस लिए मन को संयमित कर व्यापक हित के सत्कर्मों को अपनाना आवश्यक है। भगवान बुद्ध ने भी करुणा को निर्वाण का प्रमुख सा...