नई दिल्ली, फरवरी 14 -- कभी पाकिस्तान, ग्वादर को दूसरा दुबई बनाने का ख्वाब देखा था, मगर आज यही ग्वादर उसके लिए एक भारी मुसीबत बन चुका है। अरब सागर के किनारे बसा यह इलाका अब पाकिस्तान के आर्थिक, पर्यावरणीय और राजनीतिक संकट की पहचान बन गया है। चीन के साथ मिलकर अरबों डॉलर के निवेश के बावजूद ग्वादर एक विफल परियोजना साबित हो रहा है, जहां न तो स्थिरता है और न ही तरक्की।30 घंटे की बारिश में हुई थी ग्वादर की हालत खराब सबसे बड़ी समस्या जलवायु परिवर्तन और बुनियादी ढांचे की बदहाली बनकर सामने आई है। फरवरी 2024 में महज 30 घंटे की बारिश ने पूरे ग्वादर को जलमग्न कर दिया, सड़कें और पुल बह गए, जिससे पूरा इलाका बाकी देश से कट गया। यह इलाका समुद्र तल के बेहद करीब है, जिससे समुद्री जलस्तर बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। अगर यही हाल रहा, तो विशेषज्ञों का मानना है ...
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