नई दिल्ली, नवम्बर 5 -- देश भर के दुर्लभ रोग के रोगियों और उनके समर्थक समूहों ने मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बच्चों और युवाओं की ओर से पत्र लिखा है और सात नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में स्थायी वित्तपोषण सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने पत्र में कहा कि प्रशासनिक देरी और राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (एनपीआरडी) 2021 के तहत प्रतिबंधात्मक एकमुश्त वित्त पोषण सीमा के कारण सैकड़ों बच्चों को इलाज से वंचित किया जा रहा है। पत्र में कहा गया कि पिछले दो साल में ही 50 लाख रुपये की निर्धारित सीमा समाप्त होने के बाद लगभग 60 मरीजों की मृत्यु हो गई और 55 से ज्यादा मरीज महीनों तक इलाज के बिना रह गए हैं। अगर तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो साल के अंत तक यह संख्या 100 से ज्यादा हो जाएगी। लाइसोसोमल स्ट...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.