दुमका, जुलाई 20 -- शिकारीपाड़ा, प्रतिनिधि। दुमका-रामपुरहाट मार्ग मे सड़क किनारे सुखे व खतरनाक पेड़ के नीचे विश्राम करने को कांवरिया एवं राहगीर मजबूर हैं। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला मैं सुल्तानगंज से जल लेकर देवघर एवं बासुकीनाथ में जलार्पण करने के बाद लाखों की संख्या में कांवरिया तारापीठ व मलूटी पूजा करने पहुंचते हैं। दुमका रामपुरहाट न 114 जिला में काफी महत्वपूर्ण एवं दो राज्यों को जोड़ने के अलावे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को जोड़ती है जिससे शालू भर इस मार्ग में भारी संख्या में श्रद्धालु राहगीर का आना जाना लगा रहता है बावजूद इसके सड़क के किनारे सूखे पेड़ विगत कई वर्षों से जानलेवा बनी हुई है। कई बार सूखे पेड़ टूटने के कारण दुर्घटना हुई। दुमका श्रावणी मेला के दौरान पूरे सावन एवं भादो माह में सड़क के किनारे काफी संख्या में कांवरिया पेड़ के न...
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