नई दिल्ली, जनवरी 27 -- अरुण कुमार,वरिष्ठ अर्थशास्त्री भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता ऐतिहासिक तो है ही, वक्त की जरूरत भी है। वैसे भी, हर अंतरराष्ट्रीय समझौता अपनी तात्कालिक अनिवार्यताओं और भविष्य की संभावनाओं से प्रेरित होता है। दरअसल, यूरोप और भारत, दोनों को इस समय एक-दूसरे की बहुत जरूरत है। अमेरिका ने दोनों को ही दबाने की कोशिश की है। हमसे ज्यादा प्रतिकूल, बल्कि एकतरफा शर्तें उसने यूरोपीय संघ पर थोपी हैं। अमेरिका ने यूरोपीय संघ के उत्पादों पर 15 प्रतिशत आयात शुल्क तो लगाया ही, इसके साथ यह शर्त भी नत्थी कर दी है कि यूरोपीय संघ अमेरिकी उत्पादों पर कोई शुल्क नहीं लगा सकता। यही नहीं, अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर का निवेश करने को भी कहा गया है। ग्रीनलैंड के मसले पर राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोपीय संघ पर जैसा दबाव बनाया है, वह...