वाराणसी, जून 22 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। ब्रह्मलीन योगीराज देवरहवा बाबा का जीवन भगवान की भक्ति में रमा था। वह दीन दुखियों की सेवा के लिए 24 घंटे तत्पर रहते थे। वह एक सच्चे योगी भी थे। योग के माध्यम से वह भगवान से साक्षात्कार करते थे। ये बातें देश के विभिन्न हिस्सों से जुटे संतों ने रविवार को देवरहा बाबा की 35वीं पुण्यतिथि पर आयोजित धर्मसभा में कहीं। अस्सी स्थित देवरहवा बाबा आश्रम में हुए आयोजन में संतों ने कहा कि मचान पर बैठकर बाबा दीन दुखियों का कष्ट दूर करते थे। उन्हें जीवन पथ पर चलने के सुगम मार्ग बताते थे। सभी से कहते थे कि भगवान के चरणों में जिसका मन रम गया उसे सभी सुखों की प्राप्ति हो जाती है। बाबा का कब जन्म हुआ। वह कितने साल के थे यह एक रहस्य ही है। उनका आशीर्वाद लेने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित देश की बड़ी-बड़ी हस्ति...
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