नई दिल्ली, मार्च 3 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिव्यांगता के चलते किसी को न्यायिक सेवाओं में रोजगार के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा है कि दिव्यांग व्यक्तियों को न्यायिक सेवा में भर्ती के लिए किसी भी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए और राज्य को उन्हें समावेशी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए सकारात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने कुछ राज्यों में न्यायिक सेवाओं में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आरक्षण न दिए जाने को लेकर स्वत: संज्ञान वाले एक मामले सहित छह याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया है। पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि 'किसी भी व्यक्ति को केवल उसकी शारीरिक अक्षमताओं के कारण न्यायिक सेवाओं भर्ती के लिए विचार से वंचित नहीं किया जा सकता। शीर्ष...
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