शामली, दिसम्बर 1 -- दिव्यांगजन अपनी बुनियादी जरूरतों और अधिकारों के लिए सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहते हैं, लेकिन प्रमाण पत्र से लेकर पेंशन तक की प्रक्रिया उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। जिले में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए हर सप्ताह केवल एक बार जिला अस्पताल में कैंप लगाया जाता है। सीमित समय और भारी भीड़ के कारण सैकड़ों दिव्यांगजन समय पर प्रमाण पत्र नहीं बनवा पाते। कई बार दूरदराज़ क्षेत्रों से आए लोग लंबी दूरी तय करने के बाद भी निराश लौट जाते हैं। क्योंकि यहां मनोरोग चिकित्सक और न्यूरोलॉजिस्ट चिकित्सक नही है। जिस कारण अधिकतर दिव्यांगों को मेरठ जांच कराने के लिए भेज दिया जाता है। हर साल तीन दिसम्बर को विश्वभर में विश्व दिव्यांग दिवस मनाया गया। भारत सहित कई देशों में दिव्यांगजनों के अधिकार, उनकी भागीदारी और समावेशन को बढ़ावा देन...