नई दिल्ली, जुलाई 30 -- राजस्थान के एक आदिवासी गांव से जब उस बच्चे को दिल्ली लाया गया था तब वह महज 4 दिन का था। गरीबी से जूझ रहे उसके माता-पिता पहले से कई संतानों को पालने का संघर्ष कर रहे थे और उन्होंने अपनी इस औलाद को एक ऐसे अजनबी के हवाले कर दिया जिसने उन्हें तुरंत पैसा देने का वादा किया। कुछ घंटों बाद वह तस्करों की गोद में दिल्ली के लंबे सफर पर निकल चुका था। जब तक पुलिस ने उसे बरामद किया वह एक व्यस्त बाजार में खड़ी कार में था और पहले ही बेचा जा चुका था। यह बच्चा दिल्ली पुलिस की ओर उस जांच के तहत बजाए गए तीन बच्चो में से एक है, जिसने बच्चों की तस्करी के एक बड़े खेल का खुलासा किया। इस तस्करी को चलाने वाली अधिकतर वो महिलाएं हैं जो कभी एग डोनर रही हैं। अब इन पर साजिश और करप्शन का केस चल रहा है। तीनों बच्चे चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के पास हैं औ...