नई दिल्ली। हिन्दुस्तान टाइम्स, अप्रैल 2 -- दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में 69 साल की सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को दोषी ठहराने के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा है। हालांकि, साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने पाटकर की अदालत में शारीरिक उपस्थिति नहीं होने के कारण सजा पर फैसला सुनाने को टाल दिया। हालांकि जज ने साफ कर दिया कि सजा बढ़ाई नहीं जा सकती क्योंकि दिल्ली पुलिस ने इसके लिए कोई दलील नहीं दी है और वह इसे केवल बरकरार रख सकती है या कम कर सकती है। कोर्ट सजा पर आदेश सुनाने के लिए पाटकर की शारीरिक उपस्थिति की आवश्यकता के तर्कों पर 2 बजे मामले की सुनवाई करेगा। जज सिंह ने कहा, "अपील खारिज कर दी गई है, दोषसिद्धि बरकरार है लेकिन सजा सुनाए जान...
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