नई दिल्ली, नवम्बर 5 -- दिल्ली की जहरीली हवा में हर साल नवंबर आते ही सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इस बार 2 नवंबर को AQI 366 पर था, जो अगले दिन अचानक 309 पर गिर गया। लेकिन ये राहत की खबर नहीं है। हिंदुस्तान टाइम्स की गहन पड़ताल से पता चला कि ये गिरावट असल में हवा की सफाई नहीं, बल्कि डेटा के छेद और एल्गोरिदम की चालाकी का नतीजा है। शहर के सबसे प्रदूषित हफ्ते में मॉनिटरिंग स्टेशनों से गायब आंकड़े, संदिग्ध पैटर्न और नियमों की ढील ने AQI को ठीक बना दिया, जबकि जमीन पर धुआं ही धुआं था।कैसे होता है AQI का आंकलन? दिल्ली के 39 मॉनिटरिंग स्टेशनों से 6 प्रदूषकों (PM2.5, PM10 समेत) का 24 घंटे का औसत निकाला जाता है। हर स्टेशन पर सबसे खराब प्रदूषक का सब-इंडेक्स ही AQI बनता है, फिर सभी का एवरेज शहर का आधिकारिक AQI। लेकिन यहां तीन बड़ी रियायतें हैं जो खेल ...
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