नई दिल्ली, जनवरी 9 -- अक्सर हम दिन की शुरुआत अलार्म की आवाज, जल्दबाजी और अधूरे विचारों के साथ करते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह समय तय करता है कि आपका दिमाग, शरीर और भावनाएं पूरे दिन कैसे काम करेंगी। जिस तरह खाली पेट हम गलत खाना खा लें तो पाचन बिगड़ जाता है, उसी तरह सुबह उठते ही अगर दिमाग को गलत सोच, जल्दबाजी और आत्म-आलोचना से भर दिया जाए तो मानसिक संतुलन पूरे दिन बिगड़ा रहता है। सुबह के पहले 10-15 मिनट आपके पूरे दिन के हार्मोन, मूड और निर्णयों को प्रभावित करते हैं। एक पॉजिटिव मॉर्निंग रूटीन सिर्फ मोटिवेशन नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्म-विश्वास की नींव है।सुबह उठते ही खुद से कही गई बातें आपके दिमाग को दिशा देती हैं। पहला रिमाइंडर होना चाहिए- 'मैं जितना सोच रहा/रही हूं, उससे बेहतर कर रहा/रही हूं।' इससे अनावश्यक सेल्फ-क्रिटिसिज्म कम ह...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.