नई दिल्ली, दिसम्बर 2 -- सत्ता का उद्देश्य क्या होना चाहिए, इसका सबसे प्रभावी उदाहरण मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पेश किया है। उन्होंने अपने छोटे बेटे की शादी उज्जैन के सांवराखेड़ी में 21 अन्य नवयुगलों के साथ की। इस सामूहिक विवाह में मुख्यमंत्री के बेटे का आम युगलों की तरह फेरे लेना सभी के दिल को छू गया। यह विवाह केवल एक सामूहिक आयोजन नहीं था, बल्कि दहेज-प्रथा, फिजूलखर्ची और दिखावे की बढ़ती प्रवृत्ति पर सटीक चोट थी। एक ही मंडप में, विभिन्न जातियों और सामाजिक पृष्ठभूमि से आए सभी जोड़ों का समान रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न कराया गया, जो सामाजिक समरसता का अद्भुत प्रतीक बना। बाबा रामदेव और धीरेंद्र शास्त्री जैसे संतों का आशीर्वाद इस पहल को और प्रबल बनाता है। जब आज करोड़ों की चमक-दमक वाली शादियां सामान्य हो चुकी हैं, तब यह सादगीपूर्ण...