जमशेदपुर, अगस्त 6 -- मोतियाबिंद से पीड़ित बच्चों की संख्या पूर्वी सिंहभूम समेत देश के कई राज्यों में तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस बीमारी का इलाज बच्चे के पांच महीने की उम्र से पहले कर दिया जाए तो आंखों की रोशनी लौट सकती है। इलाज में देर होने पर रोशनी आजीवन कम रह जाती है। ऐसे मरीज अब डॉक्टर के पास ज्यादा संख्या में पहुंचने लगे हैं। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी की कमी के कारण ऐसे मामलों को समय रहते पहचाना नहीं जाता था। परेशानी बढ़ने पर उन्हें डॉक्टर के पास लाया जाता था या जन्मजात अंधा मान लिया जाता था। अब डॉक्टरों की पहुंच बढ़ने और नेत्र जांच शिविर लगने से जन्मजात मोतियाबिंद के कई मरीज सामने आ रहे हैं। इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी के अनुसार, प्रति 10 हजार बच्चों में सामान्य रूप से 1.6 से 3.6 तक मरीज मिलते हैं, जबक...
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