बागपत, अगस्त 29 -- बागपत, सिसाना और सरूरपुर गांव के जैन मंदिरों में चल रहे दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को जैन समाज के लोगों ने भक्ति में लीन होकर उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार किया। श्रद्धालु केसरिया धोती-दुपट्टा पहनकर भजनों की लय पर नृत्य करते हुए प्रभु की भक्ति में लीन दिखाई दिए। विधानाचार्य मयंक जैन ने कहा कि पूजा पाठ, तप ओर ध्यान से बढ़कर क्षमा है। क्रोध क्षमा को प्रकट नहीं होने देता है। अनंतानुबंधी क्रोध पाषाण पर उभरी रेखा के समान है। क्रोध विनाश की जड़ है। अहंकार भी एक क्रोध है। क्रोध के कारण रिश्ते टूट जाते हैं। घर परिवार उजड़ जाते हैं, मित्रता छूट जाती है। क्रोध के कारण सिर्फ अशांति ही रहती है। जो पल-पल में क्रोध कर रहे हैं, वो हरदम अपने लिए नए शत्रु तैयार कर रहे हैं। इसलिए हम सभी को क्रोध से बचना चाहिए। घर हो, समाज हो और चाहे ...
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