नई दिल्ली, फरवरी 5 -- गाजियाबाद में तीन सगी बहनों का नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने की घटना को महज 'आत्महत्या' कहना हकीकत से आंखें मूंदने जैसा होगा। बारह, चौदह और सोलह की उम्र तो सपनों के पंख लगाकर उड़ने की होती है। उस उम्र में मौत को गले लगाना भला किसके गले उतर सकता है? दरअसल, हालात, स्थितियों और आभासी भावनाओं के झूठे संसार ने इन मासूमों को मौत की दर तक पहुंचाया। यह एक 'डिजिटल मर्डर' है। इस खतरनाक गेम और इसे बच्चों तक परोसे जाने के जिम्मेदार लोगों के लिए कानून को नई दफाएं गढ़नी होंगी। यह दुखद हादसा खूनी डिजिटल एल्गोरिदम का परिणाम है, जो मोबाइल के जरिये हम सबके घरों में घुस आया है। यह घटना 'कोरियन लव गेम' की लत और उसके पीछे छिपे एल्गोरिदम की कारगुजारी है। यह डिजिटल एल्गोरिदम मासूमों के दिमाग को पूरी तरह से अपहृत कर लेता है और विवेक पर झूठी भ...
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