मुजफ्फरपुर, अप्रैल 22 -- मुजफ्फरपुर। जिस पाठशाला से अनुशासन, सेवा, ईमानदारी और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ बच्चे आदर्श नागरिक बनते हैं, जिले में वह खंडहर में तब्दील हो रही है। आज न केवल स्काउट-गाइड का भवन जर्जर हाल में है, बल्कि विभागीय उदासीनता के कारण इसकी गतिविधियां भी सिमट गई हैं। पिछले सत्र में तीन हजार में महज 24 सरकारी स्कूलों ने स्काउट-गाइड के प्रशिक्षण के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। हालांकि निजी स्कूलों में नियमित गतिविधियां आयोजित हो रही हैं। श्रावणी मेले में मोर्चा संभालने से लेकर आपदा के समय तत्पर रहने वाले स्काउट एंड गाइड के लिए दी जाने वाली सुविधाओं में भी कटौती कर दी गई है। रेल टिकट पर मिलने वाली रियायत अब इन्हें नहीं दी जाती। प्रशिक्षण से लेकर ड्रेस तक का शुल्क बच्चों को ही वहन करना पड़ता है। स्काउट एंड गाइड के लिए जिले का कोई बजट भी...
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