गिरडीह, सितम्बर 6 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। उत्तम आकिंचन्य धर्म अर्थात आध्यात्मिक स्तर पर सभी प्रकार के आसक्तियों का त्याग तथा मैं ओर मेरा के भावों को त्यागकर परम संतोष के रास्ते मुक्ति के मार्ग की ओर ले जाने वाला धर्म है। मेरा कुछ भी नहीं की भावना सर्वोच्च अनाशक्ति है। इन्हीं भावनाओं के साथ सम्मेदशिखर मधुबन में शुक्रवार को जैन धर्म के महापर्व दक्षलक्षण के नवम दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म का पालन किया गया। बताया जाता है कि जैन धर्मावलंबियों का सबसे बड़ा तीर्थस्थल सम्मेदशिखर जी में आत्मशुद्धि का महापर्व दक्षलक्षण पर्व की विशेष महत्ता है। जैनियों के सबसे बड़ा पर्व दसलक्षण महापर्व के उपलक्ष्य में मधुबन में धार्मिक कार्यक्रमों की धूम मची है। स्थानीय जैन अनुआई से लेकर विभिन्न राज्यों से मधुबन पहुंचे जैन श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन हैं। दक्षलक्षण महापर्व...
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