नई दिल्ली, जनवरी 20 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अदालतें कोई युद्ध का मैदान नहीं हैं कि दंपति लड़ते रहें और अपने गिले शिकवे निपटाने के लिए अदालतों का समय जाया करें। अदालत ने कहा कि उन्हें विवाद के जल्दी समाधान के लिए मध्यस्थता का रास्ता अपनाना चाहिए, क्योंकि अदालत में आरोप और प्रत्यारोप विवाद को और बढ़ाते हैं। न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने एक दंपति के बीच विवाह भंग करते हुए ये टिप्पणियां कीं। दंपति केवल 65 दिनों तक साथ रहा और दोनों एक दशक से अधिक समय से अलग रह रहे थे। विवाह में सुलह की कोई गुंजाइश नहीं देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए विवाह को भंग कर दिया। अदालत ने कहा कि झगड़ने वाले दंपतियों को अदालतों को अपना युद्धक्षेत्र बनाकर और व्यवस्था को बाधित...