शामली, जुलाई 18 -- भक्ति की कोई सीमा नहीं होती, न शरीर की, न उम्र की और न ही व्यवसाय की। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया हरियाणा के पानीपत निवासी 38 वर्षीय अशोक ने, जो पेशे से शिल्पकार हैं। वे हरिद्वार से दंडवत कांवड़ लेकर निकल चुके हैं और शामली होते हुए अपने शिवालय की ओर बढ़ रहे हैं। अशोक ने बताया कि यह उनकी 19वीं कांवड़ यात्रा है, लेकिन इस बार वे पहली बार दंडवत कांवड़ लेकर आए हैं। हर कुछ कदम पर पृथ्वी को प्रणाम करते हुए आगे बढ़ना, शरीर के लिए कठिन जरूर है, लेकिन उनका मन केवल भोलेनाथ की भक्ति में डूबा हुआ है। अशोक ने बताया कि उन्होंने इस कठिन तपस्या के माध्यम से भगवान शिव से अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की है। उनका कहना है कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि का मार्ग है।
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