नई दिल्ली, फरवरी 27 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। बीते कुछ वर्षों के दौरान अनाज, सब्जी, दालों जैसी कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई हैं। कुछ वस्तुओं के मामले में देखा गया है कि थोक (मंडी) और खुदरा कीमतों में भारी अंतर के चलते लोगों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है। मंडी और थोक कीमतों के अंदर को समझा जाए तो बीते 14 वर्षों के दौरान सबसे ज्यादा गेहूं और आटे की कीमतों में अंतर आया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी की रिपोर्ट में कृषि आपूर्ति श्रृंखला की गतिशीलता पर आधारित अध्ययन का उल्लेख किया है, जो बताता है कि वर्ष 2011 में मंडी में गेहूं की कीमतों और बाजार में बिकने वाले आटे की खुदरा कीमतों में महज पांच रुपये की अंतर है, जो वर्ष 2024 तक बढ़कर 20 रुपये तक हो गया है। उधर, अचानक से खाद्य वस्तुओं कीमतों में बढ़ोतरी के लिए जमाखोरी को ...
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