नई दिल्ली, फरवरी 13 -- अभिनव उपाध्याय नई दिल्ली। थिएटर में हम जानते हैं कि पैसे नहीं हैं, उसके बाद हम इसमें में आते हैं। थिएटर पागलपन और जज्बे का नाम है। उक्त बातें शुक्रवार को एनएसडी परिसर में भारत रंग महोत्सव के तहत एनएसडी छात्र संघ की ओर से आयोजित संवाद सत्र 'कुछ इश्क किया कुछ काम किया' के दौरान अभिनेता, संगीतकार, गायक एवं निर्देशक पीयूष मिश्रा ने कहीं। एनएसडी के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने पीयूष मिश्रा से बातचीत की। पीयूष मिश्रा ने कहा कि हम सब ने जज्बाती होकर थिएटर किया है। इसमें कोई फायदा नहीं है, जो फायदा है वह सिर्फ हम जानते हैं। मैं ऐसा नहीं कह सकता कि थिएटर ने मुझे कुछ नहीं दिया, लेकिन जो दिया उसे बता नहीं सकता। उसने मुझे सन्तोष दिया, कुछ फटे हुए टिकट, कुछ बदरंग ब्रोशर दिए। अपने संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे जल्दी...
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