पौड़ी, जुलाई 7 -- उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों की खेती अब ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत बनाएगी। जिले में भी किसान जड़ी-बूटी की खेती में रुचि ले रहे हैं। थलीसैंण के सिरतोली, मरोड़ा, पडाल, दौला व मरखोला गांवों में ग्रामीण किसान ट्रायल के आधार पर एक-एक हेक्टयर में कुटकी व कूठ की खेती करेंगे। इसके लिए ग्रामीणों को कुटकी के 20 हजार और कूठ के 1500 पौध वितरित किए गए हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) के निदेशक डा. विजयकांत पुरोहित के दिशा-निर्देशन में राठ महाविद्यालय पैठाणी में औषधीय पादपों के कृषिकरण पर कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। हैप्रेक के वैज्ञानिकों ने किसानों को कुटकी और कूठ जड़ी-बूटी के कृषिकरण, उत्पादन, संवर्द्धन संरक्षण और विपणन की जानकारी दी। साथ ही कि...
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