नई दिल्ली, मई 7 -- शशि शेखर गुजरी 22 अप्रैल को पहलगाम नरमेध के बाद देश की रोती-बिलखती बेटियों को देख मेरे मन में आइजाह बर्लिन की उक्ति उभरी थी-भेड़ियों की आजादी, भेड़ों की मौत का सबब बनती है। मैं जानता था कि ये भेड़िये बहुत दिन अपने खून लगे पंजे और दांतों का उत्सव नहीं मना पाएंगे। भारत अब वह देश नहीं रहा जो अपने ऊपर हुए आघात को चुपचाप सहन कर ले। इस कुत्सित कांड के ठीक 15वें दिन भारतीय सेनाओं ने वह कर दिखाया जो इससे पहले अब तक कभी नहीं हुआ था। मंगलवार आधी रात के बाद हिन्दुस्तानी मिसाइलों ने पाक अधिकृत कश्मीर और पंजाब के उन नौ स्थानों को ध्वस्त कर डाला, जो जिहाद के नाम पर इंसानों की औलादों को भेड़ियों में तब्दील करने की फैक्ट्रियां हुआ करते थे। याद करें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि हम दहशत फैलाने वालों को मिट्टी में ...
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