सासाराम, जून 6 -- डेहरी, एक संवाददाता। अल्लाह के मर्ज़ी को कुबुल करने और उनके हुक्म के समाने जान व माल को लूटा देने के नाम पर ईद-उल-अजहा यानी कुर्बानी है। यह अल्लाह के पैगम्बर हजरत अलैसलाम की सुन्नत है। अल्लाह ने पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा अलै सलाम को कुर्बानी करने का हुक्म दिया। ईस्लामिक कैलेंडर के अंतिम माह जिल्हज्जा की 10वी को कुर्बानी बकरीद मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्योहार 7 जून को मनाया जा रहा है। किस लिए दी जाती है कुर्बानी अल्लाह के पैगम्बर हजरत इब्राहीम को अल्लाह की तरफ से ख्वाब हुआ कि अल्लाह के नाम पर कुर्बानी करो जो चीज़ तुम्हारे नजदीक, सबसे प्यारी हो। तो उसने अपने पुत्र को सबसे प्यारा जाना और इसी बिना पर पुत्र हजरत इस्माइल को मक्का स्थित मीना के मैदान में ले जाकर उसके गले पर चाकू चलाने लगा। लेकिन फिर अल्लाह का करम हुआ...
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