नई दिल्ली, जनवरी 27 -- नई दिल्ली, मानस पिंपालखरे। देश में वाहनों से उसके पूरे जीवनकाल में होने वाले कार्बन उत्सर्जन की मैपिंग की तैयारी है। इसका उद्देश्य पर्यावरण और जलवायु को ध्यान में रखकर स्पष्ट नीति तैयार करना है जिससे वर्ष 2047 तक भारत को ग्रीन मोबिलिटी हब बनाया जा सके। भारी उद्योग मंत्रालय इसको लेकर विशेषज्ञों और उद्योग जगत के साथ संपर्क में है। मसौदे के अनुसार वाहन में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों, उत्पादों और बेशकीमती खनिजों के खनन से लेकर वाहन को तैयार करने, स्क्रैप करने और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी को रिसाइकिल करने तक होने वाले कार्बन उत्सर्जन की पूरी गणना की जाएगी। मामले से जुड़े दो जानकारों का कहना है कि वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को लेकर भविष्य में होने वाली बहस को खत्म करना है। इसके तहत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े वाहन बाजार...