नई दिल्ली, फरवरी 7 -- तेहरान क्या 'डे जीरो' की ओर बढ़ रहा है? मेरे इस सवाल से गफलत में न आएं। मैं अमेरिका के संभावित हमले का नहीं, बल्कि वहां उपजे अभूतपूर्व जल-संकट की ओर इशारा कर रहा हूं। चौतरफा समस्याओं से जूझ रही यह महानगरी बाहरी जंग के साथ इस कभी न खत्म होने वाली आपदा से भी पीड़ित है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पीड़ापूर्वक कहा है कि देश की राजधानी को स्थानांतरित करना अब विकल्प नहीं, मजबूरी है। तेहरान पर ये दुर्दिन अचानक नहीं टूटे हैं। इसका सिलसिला लंबा है। यहां की जलापूर्ति का मुख्य स्रोत अल्बोर्ज पर्वतमालाओं की बर्फ है। जितनी बर्फ पड़ेगी, उतनी ही पिघलेगी और पिघलती हुई हर बूंद यहां के लोगों के सूखते हलक भिगोने के काम आएगी। सदियों पुराना यह सिलसिला 'ग्लोबल वार्मिंग' की चपेट में आ गया है। बर्फ पड़नी कम हो गई है और साल-दर-साल आबा...