नई दिल्ली, फरवरी 1 -- आम बजट 2026 को एक सुधारवादी बजट के रूप में देखना ज्यादा मुफीद रहेगा। इस बजट पर किसी तरह का सियासी या चुनावी दबाव नहीं था और इसलिए भी इसमें आर्थिक सुधार की कोशिशें ज्यादा नजर आ रही हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि इसमें कोई लोक-लुभावन या चमकदार घोषणाएं नहीं हैं। किसी सुधारवादी बजट की यह खासियत होती है कि उसे देखकर लगता है, कोई नया या बड़ा कदम नहीं उठाया गया है। वास्तव में, आज भारतीय अर्थव्यवस्था में कदम बढ़ाने से ज्यादा जरूरी है कदम जमाना। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण की शुरुआत ही जिन तीन कर्तव्यों की चर्चा से की है, उस पर सबका ध्यान जाना चाहिए। पहला कर्तव्य, अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के प्रति लचीलापन बढ़ाते हुए आर्थिक विकास को गति देना और उसे बनाए रखना। दूसरा, अपने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और ...
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