लखनऊ, दिसम्बर 23 -- तेजस से तो बेहतर होता कि बस पकड़ कर ही आ जाते। बस में रात को बैठते तो सुबह देर तक लखनऊ पहुंच ही जाते। तेजस ने समय और पैसा दोनों बबार्द कर दिया। यह दर्द है सोमवार रात दस बजे लखनऊ जंक्शन पहुंचने के बजाय मंगलवार को अपराह्न 3:14 बजे पहुंचने वाली तेजस एक्सप्रेस के यात्रियों का। उन्हें इस बात का मलाल है कि देश की पहली कारपोरेट ट्रेन को रेलवे ने बिगाड़ दिया है। इसके पीछे तर्क दिया कि जब घने कोहरे में शताब्दी सहित अन्य ट्रेनें कुछ घंटों की देरी से दिल्ली से लखनऊ पहुंच रही हैं तो फिर यह ट्रेन 17 घंटे की देरी से कैसे चल रही है। सोमवार को अपने निर्धारित समय रात 10 बजे लखनऊ जंक्शन पहुंचने वाली तेजस एक्सप्रेस 17.14 घंटे की देरी से मंगलवार को लखनऊ जंक्शन पर पहुंची। ऑफिस के काम से लखनऊ आए गाजियाबाद निवासी रुद्र प्रताप सिंह ने कहा कि ...