नई दिल्ली, जनवरी 29 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 1995 के एक भ्रष्टाचार मामले में निचली अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की आपराधिक अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने माना कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज इस मामले में दोषसिद्धि के निष्कर्षों में कोई कानूनी खामी नहीं है और अभियोजन पक्ष ने रिश्वत की मांग व स्वीकार किए जाने के आरोप को ठोस साक्ष्यों से सिद्ध किया है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। मामले के अनुसार, वर्ष 1995 में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि शकरपुर बस्ती पुलिस पोस्ट में सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) के पद पर तैनात आरोपी ने शिकायतकर्ता को उसके भाई द्वारा की गई शिकायतों के सिलसिले में परेशान न करने के बदले दस हजार रुपये की अवैध र...