मुरादाबाद, मार्च 25 -- माहे रमजान और तीसरे अशरे 'जहन्नुम से निजात की तीसरी ताक रात रही। रोजेदारों ने पूरी रात इबादत कर शब ए कद्र की तलाश की। एतिकाफ में भी लोग बैठे। महिलाएं घरों में ही एतिकाफ में बैठीं और इबादत शुरू कर दी। यह लोग सुबह सहरी तक इबादत कर शब-ए-कद्र की तलाश करते रहे। मंगलवार को माहे रामजान का 24 वां रोजा, 25 वीं शब और तीसरी ताक रात रही। लोगों ने रातभर इबादत कर शब ए कद्र की तलाश की। नई सड़क निवासी हाफिज यूनूस की मानें तो सभी रोजेदार सुबह सहरी तक इबादत कर शब ए कद्र की तलाश करेंगे। उधर हाफिज इस्लाम नवी ने बारादरी की नायब मस्जिद में खिताब करते हुए कहा कि शब-ए -कद्र वह है जिसमें अल्लाह अपने बंदों के लिए जहन्नुम के दरबाजे बंद कर जन्नत के दरबाजे खोल देता है। जिसने माहे रमजान में गुनाहों से तौबा की और इबादत से अल्लाह को राजी कर लिया व...
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