मुरादाबाद, मार्च 20 -- रमजान बेशुमार बरकतों वाला है। इस महीने में रोजे़दारों पर अल्लाह तआला की बेशुमार रहमतें बरसती हैं। गुनाहों से माफ़ी मिलती है। इस महीने का तीसरा अशरा 20वें रोजे़ से शुरू होता है, जो ईद का चांद दिखाई देने तक जारी रहता है। इसमें इबादत करने से जहन्नम से आजा़दी मिलती है। वहीं, ग्राम बेलवाड़ा की जामा मस्जिद के पेश इमाम मुफ़्ती मुहम्मद शमशाद रज़ा नईमी ने बताया कि रमजा़न-पाक को तीन अशरों में बांटा गया है। दूसरा अशरा मुकम्मल हो गया है। तीसरे अशरे की शुरूआत के साथ ही मस्जिदों और घरों में एतिकाफ़ का सिलसिला शुरू हो गया। तीसरे अशरे में शब-ए-क़द्र भी आएगी। उन्होंने शबे क़द्र की रात को हजा़र महीनों की रातों से बेहतर बताया । कु़रान शरीफ़ भी शबे क़द्र को नाज़िल हुआ। रमजा़न के तीसरे अशरे में ही फ़ितरा और ज़कात भी अदा करना जरूरी है, ज...
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