लखनऊ, जून 21 -- शास्त्री नगर के श्रीदुर्गा जी मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में माधव शरण दास महाराज ने कहा कि तीर्थयात्रा भी पिकनिक और मौज मस्ती के लिए करने से वो पुण्य नहीं मिलता, जो कष्ट सहकर भाव भक्ति के साथ यात्रा करने से मिलता है। तीर्थ के दर्शन से अधिक फल तीर्थ में रहने से मिलता है। हेलीकॉप्टर में बैठकर एक दिन में सारे तीर्थ निपटाने में तीर्थ यात्रा का भाव ही नहीं पैदा होता। माधव शरण महाराज ने कहा कि मंदिर एवं संतों के दर्शन कर उनका कुछ समय सानिध्य करें, तब कुछ ज्ञान प्राप्त होगा। अध्यात्म के मार्ग में जीवन को थोड़ा तपस्वी बनाओ। बहुत अधिक सुविधा भोगी शरीर भोगों के ही चिंतन में लगा रहता है। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम जप करने या भगवान की लीला श्रवण से पापी, चोर, लोलुप, दरिद्र, रोगी और दुखी व्यक्ति अपने पापों का नाश करके सद्गति ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.