नई दिल्ली, दिसम्बर 21 -- वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज अपने सत्संगों में बार-बार तीर्थ यात्रा के महत्व पर जोर देते हैं। महाराज जी कहते हैं कि परमात्मा सर्वत्र हैं, लेकिन उन्हें अनुभव करने के लिए हृदय की पवित्रता जरूरी है। तीर्थ स्थल हमें वह पवित्रता प्रदान करते हैं। जैसे दूध में घी छिपा होता है, लेकिन घी निकालने के लिए दही बनाना, मंथन करना और गर्म करना पड़ता है, वैसे ही भगवान को पाने के लिए साधना और पवित्रता चाहिए। तीर्थ यात्रा हमें वह पवित्रता देती है। महाराज जी के अनुसार, तीर्थ यात्रा पर जाना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। आइए उनके उपदेशों से समझते हैं इसका महत्व।तीर्थ यात्रा से मिलती है हृदय की पवित्रता महाराज जी कहते हैं कि 'परमात्मा सर्वत्र हैं, लेकिन उन्हें पाने की प्रक्रिया है साधना। साधना के लिए पवित्रता चाहिए।...
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