प्रयागराज, अप्रैल 2 -- प्रयागराज। यदि आपका बच्चा तीन साल से कम उम्र का है। आवाज सुनकर व चेहरे का हावभाव देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं करता, आंख से आंख मिलाकर नहीं देखता तो उसे मानसिक बीमारी ऑटिज्म हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, यह समस्या जन्मजात होती है, जो तीन से चार साल तक की उम्र में ज्यादा विकसित हो जाती है। यदि समय से इसकी पहचान व इलाज न हो तो बच्चे का मानिसक विकास रुक जाता है। रिहैबिटेशनल साइकॉलिजिस्ट डॉ. श्रेया शुक्ला के अनुसार, ऑटिज्म मस्तिष्क के विकास की एक अलग शैली है। यह एक स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर है, जिसमें हर बच्चा अलग-अलग ढंग से प्रभावित होता है। कुछ बच्चों को संवाद में कठिनाई होती है, कुछ को सामाजिक संकेत समझने में परेशानी होती है। इस तरह के बच्चों का तीन साल तक की उम्र से पहले ही स्पीच और बिहेवियर थेरेपी शुरू कर देनी चाहिए।
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