गोरखपुर, जनवरी 4 -- गोरखपुर, रूद्र प्रताप सिंह गोरखनाथ मंदिर परिसर में लगने वाला खिचड़ी मेला आस्था के साथ-साथ पारंपरिक कारोबार का भी बड़ा केंद्र है। मेले में सजी खजले की दुकानों से उठती मिठास की खुशबू वर्षों से श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती रही है। कानपुर और बुलंदशहर से आने वाला खजला खिचड़ी मेले की पहचान माना जाता है और यह कई परिवारों के लिए पूरे साल की कमाई की रीढ़ है। हालांकि इससे जुड़े व्यापारियों की समय के साथ साथ कुछ चुनौतियां और चिंताएं बढ़ी हैं। साथ ही युवा पीढ़ी इस कारोबार से दूरी बना रही है। हालांकि मेला परिसर में अब तक एक दर्जन खजला की दुकानें सज चुकी हैं। बीते 50 वर्षों से खिचड़ी मेले में अपने कर्मचारियों के साथ खजला और घेवर की दुकान लगाते आ रहे कानपुर निवासी अरविंद की सबसे बड़ी चिंता इस व्यवसाय से नई पीढ़ी की दूरी है। अरविंद क...
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