लातेहार, अप्रैल 26 -- महुआडांड़, प्रतिनिधि। महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत नक्सल प्रभावित गांव तिसिया (डाड़ूलवार) अब तक सरकारी नजरों से दूर हैं। जहां प्राथमिक विद्यालय भवन तो बना, लेकिन शिक्षक कभी नहीं पहुंचे। वर्षों से तिसिया के मासूम बच्चे किताबों से कोसों दूर थे। कोई उन्हें पढ़ाने-लिखने नहीं आता था, न कोई सरकारी कर्मचारी गांव का रुख करता था। लेकिन बदलाव की किरण तब फूटी, जब गांव के ही एक जागरूक ग्रामीण, संतोष यादव ने उम्मीद की मशाल जलाए रखी। उन्होंने बार-बार गुहार लगाई। जब सरकारी व्यवस्था ने कान बंद कर लिए तब मदद के लिए केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की 211वीं बटालियन ने हाथ बढ़ाया। ग्रामीणों ने बताया कि 14 जनवरी 2025 यह तारीख तिसिया के बच्चों के लिए नया सवेरा बनकर आई। सीआरपीएफ के जवानों ने गांव में एक अस्थायी छप्पर डलवाया और वहीं से 'स्कूल की शुरुआ...
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