वाराणसी, फरवरी 21 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। रंगभरी एकादशी पर 27 फरवरी को अबकी पहली बार बाबा विश्वनाथ और माता गौरा की चल प्रतिमा को गुजरात, राजस्थान और केरल के पारंपरिक वैभव में अलंकृत किया जाएगा। शिव-गौरा के नगर भ्रमण के दौरान उत्तर से दक्षिण और पश्चिम भारत की सांस्कृतिक छवियां एक साथ झलकेंगी। टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। वाचस्पति तिवारी ने बताया कि इस वर्ष बाबा और गौरा के परिधान अहमदाबाद, जोधपुर और तिरुवनंतपुरम से मंगाए गए हैं। यह संदेश है कि काशी की आध्यात्मिक परंपरा में देश के विविध प्रांतों की छटा समाहित होगी। बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा को गुजराती और केरल के पारंपरिक परिधान में सजाया जाएगा। गुजराती शैली का अंगरखु, काठियावाड़ी कुर्ता, केरल की पारंपरिक वेष्टि या धोती (मुंडू) में बाबा का स्वरूप राजस...