मुजफ्फरपुर, नवम्बर 1 -- मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। बिहार में चुनाव की आहट मिलते ही जिन बातों पर चर्चा होती है, उसकी शुरुआत जातीय समीकरणों को साधने से होती है। खासकर उन जातियों को साधने की कोशिश होती है, जिनकी आबादी विधानसभा के परिणाम को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती है। इन जातियों के लोग किसी खास क्षेत्र में बड़ी संख्या में बसे होते हैं और वहां होने वाले चुनावों के दौरान राजनीतिक आबोहवा पर असर डालते हैं। ऐसी ही जातियों में से एक है सहनी और उसकी उप जातियां। जो पूरे प्रदेश खासकर उत्तर बिहार की चुनावी राजनीति को दशकों से प्रभावित करती आ रही हैं। ऐसे में चुनावी राजनीति का गुणा भाग देखते हुए एनडीए के साथ महागठबंधन भी इनके कथित जातीय क्षत्रपों को अपने पाले में लाने की भरपूर कोशिश करने में जुटे हुए हैं। खासकर एनडीए का घटक दल भाजपा ने नजरे तिर...
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