मुंगेर, फरवरी 15 -- तारापुर। 15 फरवरी 1932, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का वह दिन, जब बिहार के मुंगेर जिले की तारापुर की धरती देशभक्ति के ज्वार से थर्रा उठी थी। अंग्रेजी हुकूमत की गोलियों के सामने निहत्थे होकर खड़े क्रांतिकारियों ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह दिन आज भी तारापुर गोलीकांड के नाम से स्मरण किया जाता है। 1930 के दशक में जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में देशभर में सविनय अवज्ञा आंदोलन उफान पर था, तब तारापुर के युवाओं ने भी ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध आवाज बुलंद की। स्वतंत्रता की अलख जगाते हुए सैकड़ों देशभक्त 15 फरवरी 1932 को तारापुर थाना पर तिरंगा फहराने के संकल्प के साथ एकत्र हुए। अंग्रेजी प्रशासन ने प्रदर्शन को बलपूर्वक रोकने का प्रयास किया। तत्कालीन जिला पदाधिक...
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