सिद्धार्थ, दिसम्बर 13 -- इटवा, हिन्दुस्तान संवाद। पूस के आगे बढ़ते ही तराई में ठंड का असर तेज होता जा रहा है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों में महसूस किया जा रहा है। दिन में धूप निकलने के बावजूद ठिठुरन से राहत नहीं मिल पा रही है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर घटकर 12 डिग्री सेल्सियस रह जाने से गलन और सिहरन बढ़ गई है। हालात यह है कि दिन में धूप बेअसर साबित हो रही है जबकि रात में ठंड लोगों को घरों के भीतर भी परेशान कर रही है। तराई के आंगन में पूस की सर्दी अब अपने चरम की ओर बढ़ रही है। सुबह और शाम के समय हल्की ठंडी हवा के साथ गलन का असर साफ दिख रहा है। ग्रामीण इलाकों में अलाव का सहारा लिया जा रहा है लेकिन यह भी नाकाफी साबित हो रहा है। ठंड से बचाव के तमाम उपायों के बावजूद लोग कंपकंपी और जकड़न की शिकायत कर रह...
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