नई दिल्ली, फरवरी 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने एक मुस्लिम महिला की अपने पति द्वारा दिए गए तलाक-ए-हसन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को बुधवार को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पत्रकार बेनजीर हीना की याचिका पर शीर्ष अदालत के पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया। सुनवाई के दौरान बुधवार को हीना की ओर से पेश वकील सैयद रिजवान अहमद ने कहा कि पर्सनल लॉ की छूट अनियंत्रित नहीं हो सकती और ऐसी प्रथाएं कुरान में नहीं मिलतीं। हीना के पति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एम. आर. शमशाद ने कहा कि तीन तलाक पत्नी के हलफनामे में दर्ज सत्यापित पते पर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर पत्नी तलाक से बच रही है, तो आप इसे उनकी ओर से नोटिस समझे जाने के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं। इसके ...