नई दिल्ली, नवम्बर 5 -- अनुराग बेहर,सीईओ, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन सोचने की क्षमता वह विलक्षण गुण है, जो हमें अन्य प्राणियों से अलग कर इंसान बनाती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यानी एआई उस सोचने की क्षमता को ही खत्म कर रहा है। एआई नौकरियां खत्म कर रहा है। इससे झूठ-सच, नकली-असली को अलग करना मुश्किल हो रहा है। यह अपराधियों को उकसाकर हिंसा भड़का सकता है या इससे भी बदतर स्थिति पैदा कर सकता है। इसकी बदौलत कई घटनाएं घट भी चुकी हैं। आशंका है कि ये सभी मिलकर अराजकता का ऐसा मंजर उपस्थित कर देंगे, जो इंसानियत के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा। कुल मिलाकर, सबसे खतरनाक बात यही निकलकर आती है कि एआई हमारी इंसानियत को खोखला कर रहा है। कई मामलों में एआई से फायदे भी हैं। लेकिन मैं 'चीजों को समग्रता में देखने' वाली दलीलों को मानने को तैयार नहीं हूं। एआई की बाढ़ को रोकना ह...
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