फतेहपुर, नवम्बर 26 -- बिंदकी। सवेरे पानी कौन देगा, दवाएं और हालचाल कौन लेगा। घर से ड्यूटी जाने और आने तक की बात, बिताए पलो को यादकर बूढ़ी मां रामकुमारी फफकती रही। मृतक पुत्र की याद में मां कई दफा बदहवास हुई, आपा भी खोई। परिजनों ग्रामीणों ने संभाला और पुत्र के वापस आने तक का भरोसा देते रहे। जबकि जानते है कि जाने वाले कभी लौट कर नहीं आते। खजुहा के सुधीर ने एसआईआर कार्य के दबाव में आकर फांसी लगाकर शादी से एक दिन पूर्व जान दे दी थी। पुत्र की मौत से बूढ़ी मां अपना आंचल थामे आंख के लाल को यादकर बिलखती रही। आंखों में आंसू लिए बोलती रही की सवेरे सवेरे ड्यूटी जाए से पहिले पानी दई जात राहें, एही आंगन मा बैठत रहें, हमाए लाल कहा चले गए कहते हुए रोती रही। मृतक का शव करीब 30 घंटे तक कमरे में रहा और तब तक बूढ़ी मां के आंख के आंसू नहीं सूखे, बिताए पल याद...