नई दिल्ली, जनवरी 26 -- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार को 92 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही कच्चे तेल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक देश का आयात, विदेशी शिक्षा और विदेश यात्रा महंगी होने की आशंका है। इस वजह से महंगाई भी बढ़ सकती है, हालांकि इससे निर्यातकों को कुछ राहत मिलने का अनुमान है। रुपये में इस महीने अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 202 पैसे या दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। वर्ष 2025 में विदेशी कोषों की लगातार निकासी और डॉलर की मजबूती के कारण इसमें पांच प्रतिशत की गिरावट आई थी। गिरते रुपये का तात्कालिक प्रभाव आयातकों पर पड़ता है, जिन्हें समान मात्रा के लिए अधिक भुगतान करना होगा। इन क्षेत्रों पर पड़ेगा इस तरह प्रभाव आयात: भारतीय आयात में कच्चा तेल, कोयला, प्लास्टिक सामग्री, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सामान,...