सहरसा, नवम्बर 11 -- जहां कभी खेतों में गेहूं, मकई, तेलहन, दलहन की फसलें लहलहाती थी, वहां इन जंगली जानवरों के उत्पात से खड़ पतवार की भरमार रहती है। जंगली जानवर के उत्पात से क्षेत्रीय किसान हैं खासा परेशान महिषी एक संवाददाता । जनसंख्या में वृद्धि के अनुसार भोजन सामग्रियों में भी वृद्धि की आवश्यकता सहज और स्वाभाविक समझा जा सकता है, लेकिन महिषी, कहरा एवं सिमरी बख्तियारपुर प्रखण्ड क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक गांव में जंगली जानवरों द्वारा फसल बर्बाद कर दिए जाने से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन परती पड़ी रहती है। जहां कभी खेतों में धान, मकई, गेहूं, मूंग, सरसों, रैचा, खेसारी, मसूर, मटर, गोबी, आलू, बैगन, धनिया सहित अन्य सब्जी एवं मशालाओं की फसलें लहलहाती थी, वहां इन जंगली जानवरों के उत्पात से खड़ पतवार की भरमार रहती है। करीब 15 वर्ष पूर्व तक महिषी के खेतों ...
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