नई दिल्ली, दिसम्बर 13 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के मामलों में डीएनए सैंपल को फोरेंसिक प्रयोगशाला तक पहुंचाने में होने वाली देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए एक समन्वित और बाध्यकारी नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने दिल्ली पुलिस, फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल), दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग और गृह विभाग के बीच स्पष्ट समन्वय व्यवस्था विकसित करने को कहा है, ताकि जांच प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या विलंब न हो। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों तथा उच्चतम न्यायालय के बाध्यकारी आदेशों का सख्ती और समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए। पीठ ने दो...